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पीएम-आशा से किसानों को एमएसपी का भरोसा, मूल्य समर्थन तंत्र हुआ मजबूत
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21 Aug 2026 12:10 PM
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प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचने से बचाने के लिए सरकार की प्रमुख मूल्य-समर्थन योजना के रूप में काम कर रही है। योजना के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को प्रभावी ढंग से लागू करने के साथ दालों, तिलहन और खोपरा की खरीद नेफेड और एनसीसीएफ जैसी संस्थाओं के माध्यम से की जाती है। वर्ष 2026-27 के लिए पीएम-आशा के तहत 7,200 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। आधार आधारित प्रमाणीकरण, ई-नाम, ई-समृद्धि और ई-संयुक्ति जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और क्षमता बढ़ी है।
किसानों को उचित मूल्य दिलाने पर जोर
सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों सहित अधिक से अधिक किसानों तक एमएसपी का लाभ पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए हैं। सितंबर 2018 में शुरू की गई पीएम-आशा को इस उद्देश्य से तैयार किया गया था कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक कृषि वस्तुओं की कीमतों में भी स्थिरता बनी रहे। पीएम-आशा एक एकीकृत ढांचे के तहत अलग-अलग मूल्य समर्थन व्यवस्थाओं को जोड़ती है। फसल और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार इसके विभिन्न घटकों को लागू किया जाता है। इससे किसानों को कीमतों में गिरावट के दौरान मजबूरी में फसल बेचने से बचाने के साथ उनकी आय को स्थिर रखने में मदद मिलती है